बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में एक अजीब सी घटना घटी। इस गाँव का नाम था ध्रुवपुर, और ये जगह दुनिया से थोड़ी सी कट चुकी थी। लोग कहते थे कि ध्रुवपुर का हर रास्ता समय के दायरे में बंधा हुआ था, जहाँ कुछ खास दिन कभी खत्म नहीं होते थे और कुछ रातें हमेशा के लिए स्थिर रहती थीं।
गाँव में एक बूढ़ी महिला, माया दादी, रहती थी, जिनके पास अजीब तरह की कहानियाँ थीं। लोग कहते थे कि वो कभी मर नहीं सकती, क्योंकि उन्होंने समय की चाबी खोज ली थी। लेकिन कोई भी गाँववाला उनके पास जाने की हिम्मत नहीं करता था, क्योंकि माया दादी के घर के दरवाजे हमेशा बंद रहते थे और रात को अजीब सी आवाजें आती थीं।
एक दिन, गाँव में एक युवा लड़का आया—आदित्य, जो शहर से वापस अपने गाँव लौटने आया था। आदित्य को बचपन से ही माया दादी के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था, लेकिन वह कभी उसे विश्वास नहीं करता था। एक दिन, वह माया दादी के घर गया और दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुलते ही उसने देखा कि माया दादी बिना किसी चिंता के बैठी थीं और उनकी आँखों में एक गहरी सी चमक थी।
"तुम आए हो, आदित्य," माया दादी ने कहा। "तुम्हारे लिए एक कहानी है, लेकिन ध्यान रखना, यह कहानी सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं है।"
आदित्य ने डरते-डरते पूछा, "क्या कहानी है?"
माया दादी ने धीरे से बताया, "यह गाँव किसी और समय का हिस्सा था। यहां के लोग समय को बांधने में सक्षम थे, लेकिन हर बार समय के साथ खेलते हुए, कुछ चीज़ें खो जाती थीं। तुम जिस समय में हो, वह कभी इस गाँव का नहीं था, आदित्य। तुमने यहाँ तक पहुँचने के लिए एक बहुत बड़ी कीमत चुकाई है।"
आदित्य समझ नहीं पाया। माया दादी ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुमने समय को तोड़ा है, लेकिन उसे जोड़ने की शक्ति तुम्हारे पास है। अगर तुम चाहो तो इस गाँव को फिर से अपनी जगह पर लौटा सकते हो, लेकिन तुम्हें एक खतरनाक रास्ता अपनाना होगा।"
"मैं क्या करूँ?" आदित्य ने पूछा, उसकी आवाज़ में हल्की सी घबराहट थी।
"तुम्हें उस खोए हुए रास्ते पर चलना होगा," माया दादी ने कहा, "वह रास्ता जो ध्रुवपुर को उस अजनबी समय से जोड़ता है। लेकिन याद रखना, उस रास्ते पर जाने से तुम्हारी पहचान बदल सकती है।"
आदित्य को लगा कि यह केवल एक बुढ़िया की बकवास है, लेकिन कुछ अंदर से उसे यह सब सच लगा। उसने अपने रास्ते पर चलने का फैसला किया।
वह उस रात को गाँव के बाहर जा पहुँचा, जहाँ एक घना जंगल था। कहते थे कि इस जंगल में समय की धारा पलट सकती थी। आदित्य ने डरते-डरते जंगल में कदम रखा, और जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता गया, समय जैसे थम सा गया। हवा भी चुप हो गई थी। उसने सुना, हर कदम पर किसी और की सांसें उसके पीछे चल रही थीं।
तभी अचानक, जंगल की गहरी कोठरी में एक हल्की सी रोशनी नजर आई। आदित्य ने उस रोशनी की ओर बढ़ना शुरू किया और वहाँ पहुँचते ही एक रहस्यमयी दरवाजा खुल गया। उसने दरवाजे से झाँका और देखा कि वह वही गाँव था, लेकिन वह एक अलग समय में था—सभी लोग अलग थे, उनकी ज़िंदगियाँ बिल्कुल अलग थीं।
आदित्य ने महसूस किया कि यह वह जगह थी, जहाँ से ध्रुवपुर का समय खो गया था। अब उसके पास केवल एक विकल्प था: या तो वह वापस लौट जाए और वह खोया हुआ समय फिर से खोजे, या उसे इस नए समय में अपनी पहचान खोनी पड़ेगी।
वह मुस्कुराया। उसने फैसला किया, "मैं वापस लौटकर इसे ठीक करूंगा।"
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कहानी खत्म होती है, लेकिन आदित्य के साथ जो यात्रा शुरू हुई थी, वह शायद कभी खत्म न हो। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि समय कभी स्थिर नहीं रहता, लेकिन हर मोड़ पर हमें अपने रास्ते चुनने की ताकत जरूर होती है।








